करते ही सुरापान
अपने पौरुष का हुआ उनको भानघर की स्त्री को किया प्रताड़ित
राह चलती को किया अपमानित
जैसे जैसे सुरा रंग दिखाने लगी
मदहोशी उनपर छाने लगी
झूमते हुए कहीं जा गिरे
अस्थिपंजर तक हिल उठे
पहले उनके द्वारा सुरा पी गई
फिर सुरा ही उन्हें पी गयी
