Monday, October 4, 2010

सुरा का रंग

करते ही सुरापान
अपने पौरुष का हुआ उनको भान
घर की स्त्री को किया प्रताड़ित 
राह चलती को किया अपमानित 
जैसे जैसे सुरा रंग दिखाने लगी 
मदहोशी उनपर छाने लगी 
झूमते हुए कहीं जा गिरे  
अस्थिपंजर तक हिल उठे 
पहले उनके द्वारा सुरा पी गई 
फिर सुरा ही उन्हें पी गयी