Saturday, December 11, 2010

गुल वर्धन

श्रीमती गुल वर्धन,पद्मश्री विभूषित,ने २९ नवम्बर को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।सादगी की प्रतिमूर्ति,नृत्य तथा अभिनय की परिभाषा,गुल दी के निधन से कला जगत में एक शून्य छा गया है जो कभी भी नहीं भरा जा सकेगा।एक युग समाप्त हो गया है ।
रंगश्री लिटिल बैले ट्रूप,भोपाल की संस्थापक गुल दी से जब भी मुझे मिलने का अवसर मिला,मैंने अपने आपको सौभाग्यशाली माना और अनेकों सम्मानों से सम्मानित इस विदुषी को अति सहज,सौम्य और स्नेहिल पाया।कला,मानवता और ममता का अद्भुत संगम थी गुल दी।
अपनी मानवता का परिचय उन्होंने चिकित्सा विज्ञानं के लिए अपना शरीर दान करके दिया है।उनकी मृत्युपरांत उनका अंतिम संस्कार न कर उन्हें चिकित्सा विज्ञानं को सौंप दिया गया।ऐसी महान महिला के आगे समक्ष संसार नतमस्तक है।

Friday, November 5, 2010

दीप से दीप जले

दीप से दीप जले, 
सज उठे धरा सारी 
झिलमिल रोशनी में चमके
हर आँगन बाड़ी 
मिटा दे सारे तिमिर,
प्रकाशमय करे सृष्टि सारी 
 प्रेमसुधा बरसाए चहूँओर ये दीपावली


Monday, October 4, 2010

सुरा का रंग

करते ही सुरापान
अपने पौरुष का हुआ उनको भान
घर की स्त्री को किया प्रताड़ित 
राह चलती को किया अपमानित 
जैसे जैसे सुरा रंग दिखाने लगी 
मदहोशी उनपर छाने लगी 
झूमते हुए कहीं जा गिरे  
अस्थिपंजर तक हिल उठे 
पहले उनके द्वारा सुरा पी गई 
फिर सुरा ही उन्हें पी गयी


Tuesday, September 21, 2010

गीत और भक्ति

आज सजन मोहे अंग लगा लो,जनम सफल हो जाये-जब भी गीता दत्त का गया हुआ यह गीत सुनती हूँ तो मन भक्ति रस से सराबोर हो जाता है।

Wednesday, August 4, 2010

सम्मान


मन बहुत खुश है आज क्योंकि पता चला है कि रंगमंच में मेरे प्रयासों को "ग्वालियर विकास समिति" मान प्रदान करने के लिए १५ अगस्त को मुझे सम्मानित करने जा रही है।११ सालों का रंगमंचीय सफ़र तय किया है मैंने जहाँ अपने परिवार,मित्रों ,दर्शकों और समाज का भरपूर सहयोग मिला है मुझे। अलग-अलग किस्म के किरदार निभाएं हैं मैंने कई नाटकों में।आर्टिस्ट्स कम्बाइन नामक ७५ वर्ष पुरानी और ख्याति प्राप्त संस्था से १० वर्षों से जुडी हूँ।इस संस्था के साथ मैंने बेहतरीन नाटकों का मंचन किया है। किसी भी कार्य के लिए जब किसी को पहचान और सम्मान मिलता है तो मन मयूर नाच उठता है और उस दिशा में काम करने का संबल मिलताहै। 
हृदय से
ईश्वर,परिवार,मित्रों,सहकलाकारों,दर्शकों,समाज और ग्वालियर विकास समिति का आभार व्यक्त करती हूँ।

Sunday, August 1, 2010

मित्रता-दिवस

अंग्रेजी सभ्यता के अनुसार आज मित्रता-दिवस है।वैसे तो हम लोग रोज़ ही अपने मित्रों से संपर्क में रहते हैं,लेकिन आज के दिन अगर उन्हें एक भावुक सन्देश भेजा जाये तो इस मित्रता में चार चाँद लग जाते हैं और प्रगाढ़ता आ जाती है।अपने मित्र को यह बताना कि वह हमारे लिए कितना खास है,अपने आप में एक सुखद अनुभूति है। तो आज के दिन मैं अपने सभी मित्रों को शुभ-कामनाएँ
देते हुए उनका आभार व्यक्त करना चाहती हूँ जिन्होंने मुझ जैसी अजब पहेली को न केवल समझा,बल्कि कदम-कदम पर मेरा हौसला बढ़ाया और मेरे सहयात्री बने।मेरी सफलता से उन्हें ईर्ष्या नहीं प्रसन्नता मिली।वो हमेशा मेरे लिए मूल्यवान रहेंगे।ईश्वर उनकी सभी मनोकामनाएँ पूरी करे,ऐसी मेरी कमाना है। मित्रता एक चमत्कार है जो दिल में होता है।


Saturday, July 31, 2010

अभिव्यक्ति

अपने आप को अभिव्यक्त करने की चाह बचपन से थी। कभी कविताओं के माध्यम से तो कभी अभिनय के माध्यम से अपनी आवाज़ को दुनिया के सामने रखना चाहती हूँ। इस ब्लॉग के ज़रिये दुनिया को जोड़ कर सृजन के मार्ग पर ले जाने की चाह है मेरी। समय -समय पर अपने विचारों के साथ सबके सामने प्रस्तुत होती रहूंगी। दुनिया के भले लोग मेरे सहयात्री बनें ऐसी कामना है मेरी। सभी सुखी रहें,स्वस्थ रहें और इस धरा की भलाई के लिए प्रयास करें,ऐसी कामना करती हूँ।