Monday, February 21, 2011

पिया के घर चली

प्रिय बहन क्षिप्रा को

आज प्रतीक्षा पूर्ण होगी और तुम्हारे प्रियवर आयेंगे,
 मेरे ह्रदय के टुकड़े को संग अपने ले जायेंगे। 
सोलह-श्रृंगार से सजी और प्रेम लालिमा से दमकती, 
प्रिय के नाम की मेहंदी सजाये,
हाथ में वरमाला लिए, 
सुन्दरतम मेरी प्यारी बहन को किसी की नज़र न लगे। 
बाबुल का अंगना छोड़ के नया संसार बसाने चली, 
महकाए पिया का घर,आँगन ,गली-गली।
मैं कवियत्री जो नहीं जो सुन्दर कविता लिख पाती,
हृदय से निकले भावों को उत्कृष्ट रूप दे पाती।
 आड़े-तिरछे शब्दों में प्रेम सुधा बरसाती हूँ,
ओ मेरी प्रिया तुम्हें असीमित आशीर्वाद देती हूँ।



Sunday, February 6, 2011

मृगतृष्णा

क्या है अंतिम सत्य यात्रा या फिर गंतव्य? क्या तीर्थ का कोई मूल्य नहीं,
केवल तीर्थयात्रा ही सार्थक है?
क्या मोक्ष का कोई अर्थ नहीं
केवल प्रयास ही पर्याप्त है?
विचित्र द्वंद्व है पथिक के लिए
यात्रा आरम्भ करने से पहले ही हुआ जाता सशंकित है| 
क्या वह सिसीफस की अभिशप्त प्रेतात्मा है 
जो कभी अपना लक्ष्य न पा सकेगा? छटपटाता रहेगा जीवन पर्यंत? 
फिर भी निरंतर प्रयासरत रहेगा उस विराट विशाल को छू पाने के लिए 
कहीं उसे निराशा घेर तो न लेगी कि वह व्यर्थ ही प्रयासरत है? 
यह कैसी मृगतृष्णा है रे पथिक 
जो आगे बढ़ते जाने के लिए लालसा जगाती रहती है?


Wednesday, February 2, 2011

जन्मदिन

धन्यवाद् उन सभी लोगों का जिन्होंने आज मेरा जन्मदिन याद रखा और मुझे शुभकामनाएं दी।वैसे तो मित्रता और किसी भी रिश्ते को किसी खास दिन की आस नहीं रहती,पर फिर भी जब कोई रिश्तेदार या दोस्त आपका जन्मदिन याद रखता है तो खुद को खास होने का सुखद एहसास होता है।ऐसा लगता है कि आप किसी के लिए विशेष हैं और वो आपके जीवन से जुड़े46 पहलूओं को महत्त्व देते हैं। अपनों की शुभकामनाओं का जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।यह एक दिन पूरे साल भर को तरोताज़ा कर देता है और संबंधों की गांठ को और मज़बूत बना देता है।एक बार फिर से शुक्रिया कि आप सब ने मुझे याद रखा।