Monday, February 21, 2011

पिया के घर चली

प्रिय बहन क्षिप्रा को

आज प्रतीक्षा पूर्ण होगी और तुम्हारे प्रियवर आयेंगे,
 मेरे ह्रदय के टुकड़े को संग अपने ले जायेंगे। 
सोलह-श्रृंगार से सजी और प्रेम लालिमा से दमकती, 
प्रिय के नाम की मेहंदी सजाये,
हाथ में वरमाला लिए, 
सुन्दरतम मेरी प्यारी बहन को किसी की नज़र न लगे। 
बाबुल का अंगना छोड़ के नया संसार बसाने चली, 
महकाए पिया का घर,आँगन ,गली-गली।
मैं कवियत्री जो नहीं जो सुन्दर कविता लिख पाती,
हृदय से निकले भावों को उत्कृष्ट रूप दे पाती।
 आड़े-तिरछे शब्दों में प्रेम सुधा बरसाती हूँ,
ओ मेरी प्रिया तुम्हें असीमित आशीर्वाद देती हूँ।



No comments:

Post a Comment