श्रीमती गुल वर्धन,पद्मश्री विभूषित,ने २९ नवम्बर को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।सादगी की प्रतिमूर्ति,नृत्य तथा अभिनय की परिभाषा,गुल दी के निधन से कला जगत में एक शून्य छा गया है जो कभी भी नहीं भरा जा सकेगा।एक युग समाप्त हो गया है ।
रंगश्री लिटिल बैले ट्रूप,भोपाल की संस्थापक गुल दी से जब भी मुझे मिलने का अवसर मिला,मैंने अपने आपको सौभाग्यशाली माना और अनेकों सम्मानों से सम्मानित इस विदुषी को अति सहज,सौम्य और स्नेहिल पाया।कला,मानवता और ममता का अद्भुत संगम थी गुल दी।
अपनी मानवता का परिचय उन्होंने चिकित्सा विज्ञानं के लिए अपना शरीर दान करके दिया है।उनकी मृत्युपरांत उनका अंतिम संस्कार न कर उन्हें चिकित्सा विज्ञानं को सौंप दिया गया।ऐसी महान महिला के आगे समक्ष संसार नतमस्तक है।
श्रीमती गुल वर्धन जी को हमारी भावभीनी श्रधांजलि |
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