Saturday, March 31, 2012

गर्मियों की दोपहर



गर्मियों की अलसाई सी एक दोपहर 
खट्टी क्यारियों की सी चटपटी ये दोपहर 
चिड़ियों की चहचहाट सुनती ये दोपहर 
दूर से गाय का रम्भाना सुनती ये दोपहर 
खाना खाकर ऊंघते लोगों को 
नींद में थपथपाकर सुलाने वाली दोपहर 
मेरे जैसे आलसी कंप्यूटर प्रेमी प्राणी को 
अपने आगोश में समाने वाली ये दोपहर 
सिर्फ सुबह, शाम और रात ही नहीं 
कड़कती धूप को अपनी  गोद में समाने वाली भी 
उतनी ही प्यारी है ये मासूम  दोपहर 





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