गर्मियों की अलसाई सी एक दोपहर
खट्टी क्यारियों की सी चटपटी ये दोपहर
चिड़ियों की चहचहाट सुनती ये दोपहर
दूर से गाय का रम्भाना सुनती ये दोपहर
खाना खाकर ऊंघते लोगों को
नींद में थपथपाकर सुलाने वाली दोपहर
मेरे जैसे आलसी कंप्यूटर प्रेमी प्राणी को
अपने आगोश में समाने वाली ये दोपहर
सिर्फ सुबह, शाम और रात ही नहीं
कड़कती धूप को अपनी गोद में समाने वाली भी
खट्टी क्यारियों की सी चटपटी ये दोपहर
चिड़ियों की चहचहाट सुनती ये दोपहर
दूर से गाय का रम्भाना सुनती ये दोपहर
खाना खाकर ऊंघते लोगों को
नींद में थपथपाकर सुलाने वाली दोपहर
मेरे जैसे आलसी कंप्यूटर प्रेमी प्राणी को
अपने आगोश में समाने वाली ये दोपहर
सिर्फ सुबह, शाम और रात ही नहीं
कड़कती धूप को अपनी गोद में समाने वाली भी
उतनी ही प्यारी है ये मासूम दोपहर

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