न मैं जानूँ जप तप न मैं जानूँ ध्यान
न मैं जानूँ पूजा न ही विधि विधान
न मैं साधूँ आसन न बूझूँ पुराण
मैं तो बस अर्पण कर सकूँ प्रण औ प्राण
जो तेरी मर्ज़ी जो तेरी लीला वो तो तू ही जान
मैं हूँ तुझमें तू है मुझमें इसका दे दे ज्ञान
न मैं जानूँ पूजा न ही विधि विधान
न मैं साधूँ आसन न बूझूँ पुराण
मैं तो बस अर्पण कर सकूँ प्रण औ प्राण
जो तेरी मर्ज़ी जो तेरी लीला वो तो तू ही जान
मैं हूँ तुझमें तू है मुझमें इसका दे दे ज्ञान

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